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नगर निगम चुनाव, 2020 (राजस्थान ) जोधपुर, कोटा और जयपुर

 

                                नगर निगम चुनाव, 2020

                                       जोधपुर कोटा जयपुर

                                               ‘आज का वोटर’

‘यह पब्लिक सब जानती है’ हमारे यहाँ नगर निगम चुनाव का रंग अपने चरम पर पहुच रहा है जोकि दो चरण में होने जा रहा है 29 october और november 1, 2020. वोटर मोटे तोर पर दो पार्टियों में बटा दिख रहा है BJP और Congress. वेसे इस बार निर्दलीय भी मुकाबले में है हर बार होते है इस बार जायदा है हो भी क्यों ना बड़े नेता अपने चहेतों ticket देना या फिर साथ वाले का ऊपर चड़ना या फिर पुरानी आदवत निकला कुछ भी हो सकता है वेसे इन So Called बागियों के जितने पर ना पार्टी को इनमे शामिल करने में एतराज़ होगा ना इन्हें फिर से पार्टी join करने में जो कल तक एक दुसरे को बुरा भला कह रहे थे. शायद इसे ‘घर वापसी कहते है’ वोटर सब जनता है फिर इन्हें क्यों गाली देता है ? चुन तो वोटर रहा है ना क्या हम सेन्टर पॉलिटिक्स को नहीं नहीं देखते जो वहा होता है वही यहाँ भी होता है, किसी को किसी से कोई मतलब नहीं है सिर्फ Seat (सत्ता) से मतलब है केसे भी मिले इसमें चाहे कश्मीर, महाराष्ट्र कही कि भी मिसाल ले सकते है वोटर ने वोट किसको दिया और alliance किसके साथ हुआ. वोटर इस कंडीशन में खुद को ठगा हुआ महसूस करता है. किसी से कुछ नहीं छुपा है फिर लम्बी लम्बी बहस और हा इसमें वो लोग भी शामिल है जो वोट नहीं देते फिर आप क्यों इतनी बाते तो जवाब मिलेगा हम इसमें शमिल हो कर गुनाहगार नहीं बनना चाहते फिर अब तो NOTA का आप्शन भी तो है आप बता दे आपकी नज़र में कोई काबिल नहीं. वोट दे कर अपनी जागरूकता का परिचय तो दे.

 

पार्टी किस आधार पर ticket  देती है. किसी नेता से On Record जवाब मागो सब बोलेगे काबिलियत देकर, पार्टी के साथ रह कर काम करना, शिक्षित सबसे एहम साफ़ सुथरी छवि (कोई criminal रिकॉर्ड नहीं). पर असल में क्या होता है ? धर्म, जाति, रिलेशन देखकर दिया जाता है इस एरिया में कौन जायदा है. यह सबको मालूम है.

अल्लामा इकबाल का एक शेर याद आ रहा है.

“जम्हूरियत इक तर्ज़ ए हुकूमत है कि जिसमे बन्दों को गिना करते है, तोला नहीं करते”

फिर क्यों वोटर गाली देता है के पॉलिटिक्स है में कोई किसी का नहीं होता. इनको चुन कौन रहा है वोटर हे ना और वोटर केसे केसे को चुन रहे है उससे मतलब नहीं है फिर बाद में वोही 5 साल तक रोना. वार्ड कि बात करे तो दिन में 2 बार छोड़ एक बार भी सही तरह से सफाई होती है या खाना पूर्ति होती है, Sewerage Line से गन्दा पानी सड़क पर आये दिन बहता रहता है. क्युकी जब भी नया काम होता है उसमे बस बिल बनाना होता है समस्या का समाधान करना नहीं. कोई बोलता नहीं है या complain नहीं करता है और जो करता है उसको पीछे से बुरा भला कहते है.

‘जिन्दा रहे चाहे जान जाये, वोट उसी को दो जो काम आये’

                                           अजात

खेर लोग आजकल Deplomat हो गए है कोई किसी को सामने कुछ नहीं कहता है और जो बोलने है उनको पागल बोलते है कि इनको वक़्त के साथ नहीं चलना आता है. हा Social Media पर जरुर एक दुसरे कको बुरा भला बोलते है और गाली देने में भी गुरेज़ नहीं करते है. क्यों करते हो इस तरह से ? क्या आपको पता नहीं यह लोग आपने फायदे के लिए इधर से उधर कूदने में ज़रा भी वक़्त नहीं लगायेगे और आप अपने Relation ख़राब कर रहे हो ?

एक बात और क्या दो बड़ी पार्टी के अलग कोई इलेक्शन फाइट नहीं कर सकता है ? अगर नहीं तो कानून बना दो और हा तो फिर क्यों कहते हो यह उस पार्टी का एजेंट है और यह उस पार्टी का. वोटर को सब पता है किसको वोट देना है. वोट केसे ख़राब होता है ? क्या जितने वाले Candidate को आपने वोट दिया तो आपका वोट सही हो जायेगा और नहीं तो ख़राब सोचना इस बारे में ?

हमारे जोशपूर शहर में 65 वार्ड से 160 हो गए है. इससे एक तो फायदा होगा कि चुना गया पार्षद अपने वार्ड में अपने वार्ड का विकास करा सकेगा टीक उसी तरह जिस तरह एक टीचर अपने क्लास में कम बच्चो के होने पर उन पर पूरा पूरा Concentrate कर सकता है. पर इसके साथ एक सवाल उठता है क्या कर्मचारी बढाये जायेगे क्योंकि आज जो सरकार के हालत है वो किसी से छुपे नहीं है और कुछ नहीं तो सफाई के मसले पर इसकी एक मिसाल हमारे वार्ड (37 जो अब 34 ) का ही दे देता हु हमारे यहाँ September 2018 में सफाई कर्मचारी Sitaram का Retirement हुआ पर आज दिन तक कोई परमानेंट नहीं लगा है. हर बार कभी कभी कोई. काफी बार complain भी की पर कोई रिजल्ट नहीं और तो और एकल खिड़की पर February, 2020 पर Complain भी की. जब अभी कमी कर्मचारियों कमी है तो फिर आगे क्या होगा. पर हमें पॉजिटिव सोच के साथ अपने वार्ड, शहर के बारे में रहना पड़ेगा, सब सही होगा. तब एक स्मार्ट वार्ड या आदर्श वार्ड बना सकते है इसमें लोगो को भी जागरूक होना पड़ेगा.

इस बीच हम Covid 19 को लेकर कितने सतर्क है चाहे वो सेंट्रल लेवल पर हो या फिर हमारे यहाँ पिछले दिनों पंचायत चुनाव हुए और बिहार में बिधान सभा होने जा रहे है कहा है सोशल डिस्टेंस और मास्क (क्या मास्क लगाने पर virus अन्दर नहीं जा पायेगा ? google करना), Festival Session शुरू हो चूका है और मार्किट में कितनी भीड़ है सब देख रहे है सोजती गेट Chopati पर crowd खड़े खड़े खा रहा है. सब कुछ खुल चूका है लोग ट्रेन, बस और प्लेन में Seat to Seat सफ़र कर रहे है. फिर सोशल डिस्टेंस केसे ?

 “जब तक दवाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं, लेकिन जहा जहा election है, यह Apply नहीं”

फिर भी अपनी care करो, election कुछ दिन में चला जायेगा और फिर वोही दोस्त, पडोसी हे काम आयेगे और आपका जीता हुआ पार्षद भी (सही चुना तो) बाकी सब मोह माया है, यह दुनिया फ़ानी है.

 

 

Abdul Hadi Chouhan

M.A. Journalism & Mass Communication (Semester III),

JNV University, Jodhpur

@abdulhadichouha

roznamajumum@gmail.com

Date : 25-10-2020

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